Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अनन्तस्यात्मतत्त्वस्य सर्वशक्तेर्महात्मनः ।
संकल्पशक्ति रचितं यद्रूपं तन्मनो विदुः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : रघुवर, सर्वशक्तिशालिनी माया से शबलित असीम
आत्मतत्त्वका पहले रचित संकल्पशक्तिवाला जो रूप है, उसको लोग मन कहते हैं