Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
मृगतृष्णातरङ्गिण्यो यथा भास्करतेजसः ।
सर्वा दृश्यदृशो द्रष्टुर्व्यतिरिक्ता न रूपतः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे चन्द्रमा की चाँदनी चन्द्रमासे पृथक् नहीं है
और जैसे तेजकी प्रभा तेजसे भिन्न नहीं हे वैसे ही ये सब दृश्य पदार्थ द्रष्टा ब्रह्म के स्वरूप से
अतिरिक्त नहीं हे