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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

य एवमनुत्पन्ने जगति या ब्रह्मणश्चिन्मनोरूपिणी साहंकारे परिकल्प्य ब्रह्म ब्रह्मतामेति ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

रहा, इस आशय से कहते हैं। इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे समुद्र से तरंगों की उत्पत्ति होती है वैसे ही तीनों लोकों के मध्यवर्ती सम्पूर्ण पदार्थों की उत्पत्ति उक्त ब्रह्म से हुई है । ८॥ जगत्‌ की उत्पत्ति का प्रकार इस तरह दर्शाया गया है । चूँकि जगत्‌ ब्रह्म का विवर्त ही है, अतएव परमार्थतः उत्पन्न न हुए जगत्‌ में जो ब्रह्म का चित्तरूपी चैतन्य है, वह अहंकारसमष्टिरूप उपाधि में ब्रह्म प्रविष्ट-सा है ऐसी कल्पना कर ब्रह्मताको (परमेष्ठिता को) प्राप्त होता है