Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, Verses 4–5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, verses 4–5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 4,5
संस्कृत श्लोक
तेन राम योऽयं परमेष्ठी तन्मनस्तत्त्वं विद्धि ॥ ४ ॥
समनस्तत्त्वाकारो भगवानब्रह्मा संकल्पमयत्वाद्यदेव संकल्पयति तदेव पश्यति ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे श्रीरामजी, जो यह परमेष्ठी (ब्रह्मा) है, उसीको आप मनरूप तत्त्व जानिए ।
मनरूप तत्त्व के आकारवाले भगवान् ब्रह्मा संकल्पमय होने के कारण जिस वस्तु का
संकल्प करते हैं, उसीको देखते हैं