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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

भानुरुवाच । तेनैतद्वच्मि भवगन्यथाकालं मनो मुने । अनिग्राह्यमभेद्यं च शापैरपि दुरासदैः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

भानु ने कहा : हे भगवन्‌, चूँकि भरत का शाप मनोनिग्रह में समर्थ नहीं हुआ, इसलिए मैं यह कहता हूँ, मन अत्यन्त कठिन शापो से भी निग्रह के अयोग्य ओर अभेद्य है

सर्ग सन्दर्भ

नब्बेवाँ सर्ग समाप्त इक्यानबेवाँ सर्ग भानु को मनु बनाकर ब्रह्मा की सृष्टि का और ऐन्दवों की सृष्टि के समान विश्व की मनोमात्रविलासता का निरूपण |