Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यो बद्धपदतां यातो जन्तोर्मनसि निश्चयः ।
स तेनैव विना ब्रह्मन्नान्येन विनिवार्यते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो कर्म इन्द्रियों द्वारा
किया जाता है, उसका विनाश हो सकता है, पर मन के निश्चय से किए हुए कर्म को कोई भी
विनष्ट नहीं कर सकता ॥१८।॥ हे ब्रह्मन्, प्राणी के मनमें जो निश्चय बद्धमूल हो गया, उसका
उसके बिना दूसरा निवारण नहीं कर सकता