Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
येनैव मनसा सर्गो निर्मितः परमेश्वर ।
स एव मांसनेत्रेण तं पश्यति हि नेतरः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तब तो ऐन्दव द्विजों की सृष्टि को ही मैं अपनी आँखों से देखू इस पर कहते हैं।
हे परमेश्वर, जिस पुरुष ने मन से सृष्टि की, वही चर्मचक्षु से उस सृष्टि को देख सकता है,
दूसरा नहीं देख सकता