Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
अथालोक्य चिरं कालं मनसैवाहमम्बरात् ।
अर्कं तस्माज्जगज्जालादेकमानीय पृष्टवान् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके वाद चिरकाल तक उस अतुल
मायाजाल को देखकर मैने मन से ही उस भुवन के आकाश से एक सूर्य को सत्यसंकल्प
से अपने समीप बुलाकर पूछा