Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
एवमालोक्य शुद्धेन परेण स्वेन चेतसा ।
भृशं विस्मयमापन्नः किमेतत्कथमित्यलम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस सबका अपने परम शुद्ध चित्त से
विचार कर मैं अत्यन्त विस्मय को प्राप्त हुआ कि यह क्या हे ओर केसे है ?