Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
लोकान्तरेषु सङ्घेन देवासुरनरोरगाः ।
उदुम्बरेषु मशका इव घुंघुमिताः स्थिताः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
उन भुवनो के मध्य में गूलर के फल के मध्यमें स्थित छोटे छोटे मशकों के
समान देवता, असुर, नर, नाग आदि संघशः घुं घुं शब्द करते हुए स्थित हैँ