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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । हिमवद्गह्वरे प्रोत्था सा कथं कृष्णराक्षसी । बभूव कर्कटी नाम्ना यथावद्वद मे प्रभो ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌, हिमालय पर्वतकी गुफामें वह राक्षसी केसे कर्कटी नाम से उत्पन्न हुई यह मुझसे आप यथार्थरूप से कहिए । भाव यह कि उसकी कृष्णवर्णता ओर कर्कटी नाम होने में क्या हेतु है ? ऐसी रामचन्द्रजी ने आशंका की