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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 90

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 90 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 90

संस्कृत श्लोक

मातृमानप्रमेयादिद्रष्टृदर्शनदृश्यता । एतावज्जगदेतच्च परमाणौ चिति स्थितम् ॥ ९० ॥

हिन्दी अर्थ

भूत, भावी और वर्तमान जगत्‌ किसके अन्दर रहता है ? इस प्रश्न का उत्तर कहते हैं। भूत, भविष्यत्‌ आदि जगत्‌ शास्त्रीय प्रमाता, प्रमाण, प्रमेय ओर प्रमितिरूप ही है और लौकिक रीति से द्रष्टा, दर्शन ओर दश्य-त्रिपुटीरूप ही है, इससे अधिक नहीं है । वह सब जगत्‌ साक्षीभूत चित्परमाणु में स्थित है