Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 81
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 81 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 81
संस्कृत श्लोक
दिक्कालाद्यनवच्छिन्नः परमात्मास्ति केवलः ।
सर्वात्मत्वात्स सर्वात्मा सर्वानुभवत स्वतः ॥ ८१ ॥
हिन्दी अर्थ
देश, काल आदि से अनवच्छिन्न, असरत् होते हुए भी सत् किससे द्वैत भी अभिन्न है, इस
प्रश्न का उत्तरदेतेहै।
देश, काल आदि से अनवच्छिन्न केवल अद्वितीय परमात्मा ही है, सबका आत्मा होने
के कारण सबसे अभिन्न है तथा अनुभवरूप होने के कारण स्वतः सर्वानुभवरूप ही हे, जड़
नहीं है