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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

अभिजातस्य यस्यान्तर्यद्यथा प्रतिभासते । तत्तथा पश्यतीवासौ दृष्टान्तोऽत्र शिशोर्मनः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

आविर्भूत हुए चित्तवाले जिसके अन्दर जो-जो वस्तु जैसे प्रतिभासित होती है, उसको वह वैसे ही देखता-सा है, इसमें बच्चे का मन दृष्टान्त है । यानी बच्चे के हृदय में जो वस्तु (स्थाणु- वेताल आदि) जैसे प्रतिभासित होती है, उसको वह वैसे ही यानी सत्य ही देखता हे