Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
बीजस्यान्तस्थवृक्षस्य व्योमाद्वैता स्थितिर्यथा ।
ब्रह्मणोऽन्तस्थजगतः साक्षित्वाच्चित्स्थितिस्तथा ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
(आकाशकोशवत् इस कथन का तात्पर्य कहते है ।
जैसे बीज के भीतर स्थित वृक्ष की, अतिसूक्ष्म होनेके कारण स्थिति, आकाशतुल्य है,
वैसे ही ब्रह्म के भीतर स्थित जगत् का आत्मा साक्षी है, अतः जगत् की साक्षी से पृथक् प्रतीति
न होने के कारण, चिद्रूप से ही स्थिति है, इस प्रकार चैतन्य का भेदक न होने के कारण उसको
आकाश कोश की उपमा दी गई हे