Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
न निमेषोऽस्ति नो कल्पो नादूरं न च दूरता ।
चिदणुप्रतिभैवैवं स्थितान्यान्यान्यवस्तुवत् ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
तो वास्तविक तत्त्व क्या है 2 इस पर कहते हैँ ।
न निमेष है, न कल्प है, न सामीप्य (नजदीकी) है और न दूरता है, इस प्रकार चिद् अणु
की प्रतिभा ही अन्यान्य वस्तुओं की नाई स्थित है, उसके अतिरिक्त कुछ नहीं हे