Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
परमव्योम्न्यनाद्यन्ते चिन्मात्रपरमात्मना ।
विचित्रं त्रिजगच्चित्रं तेनेदमकृतं कृतम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में विचित्र चित्र बनानेवाला कौन है, इस प्रश्न का उत्तर देते हैं ।
आदि और अन्त से रहित परमाकाश में चिन्मात्र परमात्मा ने यह विचित्र त्रिजगत्रूपी
चित्र, जो कि मिथ्या होने के कारण अनिर्मित-सा ही है, बनाया है