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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 8, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 8, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । कयैतज्ज्ञायते युक्त्या कथमेतत्प्रसिध्यति । न्यायानुभूत एतस्मिन्न ज्ञेयमवशिष्यते ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्री वस्रिष्ठजी ने वक्ष्यामि युक्तितः“ ऐसी पहले जो प्रतिज्ञा की थी, उसीको श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं : भगवन्‌, जो आपने कहा कि "यदिदं दृश्यते राम तद्‌ ब्रह्मैव निरामयम्‌" (हे श्रीराम्‌, जो यह जगत्‌ दिखलाई देता है, यह निर्मल ब्रह्म ही है) यह किस युक्ति से जाना जाता है, किस प्रकार यह सिद्ध होता है और केसे युक्तयो द्वारा इसके अनुभूत होने पर कुछ ज्ञातव्य शेष नहीं रहता ?

सर्ग सन्दर्भ

सातवाँ सर्ग समाप्त आठवाँ सर्ग पूर्वोक्त तत्त्वका ज्ञान सतशास्त्रों से ही होता है अन्य से नहीं, सत्शास्त्रोमें भी यह ग्रन्थ तुरन्त फलदायक है, यह कथन।