Guru's AddaGuru's Adda

Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 8

सातवाँ सर्ग समाप्त आठवाँ सर्ग पूर्वोक्त तत्त्वका ज्ञान सतशास्त्रों से ही होता है अन्य से नहीं, सत्शास्त्रोमें भी यह ग्रन्थ तुरन्त फलदायक है, यह कथन।

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  1. Verse 1श्री वस्रिष्ठजी ने वक्ष्यामि युक्तितः“ ऐसी पहले जो प्रतिज्ञा की थी, उसीको श्रीरामचन्द्रजी…
  2. Verses 2–4श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामजी, यह मिथ्याज्ञानरूपी विषूचिका चिरकाल से बद्धमूल हे, इ…
  3. Verses 5–14निवृत्त हो जाता है, वैसे ही इस शास्त्र के विचार से यथास्थित ही दृश्य जगत्‌ अस्त को प्राप्…
  4. Verse 15यदि शंका हो कि इस शास्त्र के अतिशयमें हेतु क्या है, तो इस पर कहते हैं। जैसे उत्तम ओषधिके…
  5. Verses 16–17इस शास्त्र के सुनने पर श्रोता पुरुष जीवन्मुक्ति का स्वयं ही अनुभव करता है, यह जो हमने कहा…