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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, Verses 8–9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, verses 8–9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 8,9

संस्कृत श्लोक

यदि देहं त्यजामीदं तन्न्यायोपार्जितं विना । न किंचिदस्ति निर्न्यायं भुक्तोऽर्थो हि गरायते ॥ ८ ॥ यत्र लोकक्रमप्राप्तं तेन भुक्तेन किं भवेत् । न जीवितेन नो मृत्या किंचित्कारणमस्ति मे ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि न्यायोपार्जित भोजन के बिना इस शरीर का मैं परित्याग कर दूँ, तो कोई अन्याय नहीं होगा, क्योकि न्यायरहित थोड़ासा भी अन्न यदि ग्रहण किया जाय, तो वह विष हो जाताहे।जो वस्तु लोकसम्मत रीति से प्राप्त नहीं हे, उसके भोजन से क्या फल सिद्ध होगा ? मुझे न तो जीवन से कोई लाभ है ओर न मरने से मेरी कोई हानि है