Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अथाभवदसौ सूची कर्कटीराक्षसी पुनः ।
सूक्ष्मैव स्थौल्यमायाता मेघलेखेव वार्षिकी ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामजी, सम्पूर्णं अवयवों के प्रादुर्भूत होने के बाद यह
कर्कटी नाम की राक्षसी सूक्ष्म होकर भी फिर ऐसे स्थूलता को प्राप्त हुई जैसे वर्षाकाल की
मेघपंक्ति सूक्ष्म होती हुई भी स्थूलता को प्राप्त होती है
सर्ग सन्दर्भ
पचहत्तरवाँ सर्ग समाप्त छिहत्तरवाँ सर्ग देह को प्राप्त करके समाधि में बैठी हुई छः महीने में क्षुधित होकर समाधि से उठी हुई कर्कटी का वायु के वचन से किरातों के देश में जाना।