Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 75, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 75, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
इत्युक्त्वा गगनतलाज्जगाम देवः सूची सा भवतु ममेति किं विरोधः ।
रागो वाब्जजवचनार्थवारणेऽस्मिन्नित्यन्तः स्वतनुमयी मनाग्बभूव ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह कहकर देवाधिदेव ब्रह्माजी आकाश से चले गये ओर सूची भी ब्रह्माजी ने
जो कुछ कहा वह मुझे प्राप्त हो, उसमें मेरा क्या विरोध है ओर उनके वरदान के निवारण में
मेरा अनुराग क्यों हो" यह विचार कर पहले अपने मन में पूर्व शरीराकार हुई यानी पूर्व शरीर का
उसने पहले अपने मन में स्मरण किया