Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verses 52–59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verses 52–59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 52-59
संस्कृत श्लोक
भूमेः सप्तसमुद्रान्ते निबद्धां विपुलस्थलीम् ।
लोकालोकाद्रिरसनां ततो मणिमयोपमम् ॥ ५२ ॥
स्वादूदकाब्धिवलयं सकोटरककुब्गणम् ।
पुष्करद्वीपवलयं तदन्तर्गिरिमण्डले ॥ ५३ ॥
मदिराम्भोधिवलयं तज्जलेचरसंस्थितम् ।
गोमेदद्वीपकटकं तन्मध्यविषयव्रजम् ॥ ५४ ॥
इक्षूदकाब्धिपरिखं शान्तं गिरिगणान्तरम् ।
क्रौञ्चद्वीपोर्वरापीठं शान्तं गतगिरिक्रमम् ॥ ५५ ॥
क्षीराब्धिमुक्तावलयं समध्यगतनायकम् ।
श्वेताख्यद्वीपवलयं सभूतप्रविभागकम् ॥ ५६ ॥
ततो घृतोदवलयस्वान्तस्थपुरमन्दिरम् ।
कुशद्वीपवृतिव्याप्तं समहाशैलकोटरम् ॥ ५७ ॥
दध्यम्भोराशिरशनासान्ताम्बरपुरोदरम् ।
शाकद्वीपोर्वराकारं सान्तस्थविषयान्तरम् ॥ ५८ ॥
क्षाराम्भोराशिपरिधिं सान्तस्थविषयान्तरम् ।
जम्बूद्वीपे महामेरुं कुलपर्वतसंकुलम् ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
सब कुछ देख लिया, यह जो कहा उसका विस्तार करते हैं।
सात समुद्रो के ओर भूमिके अन्त मेँ लोकालोक पर्वत की करधनीरूप, प्राणियों से रहित
स्वर्णमय भूमि को उसने देखा, तदनन्तर मणिमयाकार पुष्कर द्वीप को देखा, जो स्वादु जल के
समुद्र से घिरा था और पर्वतों की सन्धि में स्थित देशों और दिशाओं से युक्त था, उसके बाद
पुष्करद्वीप के अन्तर्गत पर्वतों में वृत्ताकार गोमेदद्वीप को देखा, जो सुरासमुद्र से घिरा था, उस
देश में रहनेवाले जलचरों से वह व्याप्त था, इससे उस देश के प्राणियों की जल और स्थल
दोनों में समानरूप से संचरण-सामर्थ्य प्रतीत होती है। तदनन्तर उसने मध्यवर्ती देशों से पूर्ण
क्रौंच द्वीप को देखा, जो इक्षुदकसमुद्र से घिरा था, उपद्रवरहित था, पर्वतश्रेणियों से व्याप्त
था एवं उर्वरा पृथ्वी का वह पीठस्वरूप था। तदनन्तर उसने वृत्ताकार श्वेतद्वीप को देखा, वह
क्षीरसागररूप मोतियों से जटित कंकण से घिरा था, मध्य में त्रिलोकीनाथ विष्णु भगवान से
अधिष्ठित था, उसमें अवान्तर प्राणी एवं भिन्न भिन्न खण्ड थे तदनन्तर जिसके मध्यवर्ती
मन्दिर, नगर घृतसमुद्र से परिवेष्टित थे ऐसे कुशद्वीप को उसने देखा, उसमें बड़े बड़े पर्वत
ओर उनकी संचि में स्थित देश थे। तदनन्तर उसने दधिसमुद्ररूपी करधनी से सीमित आकाश
ही जिसका नगर रूपी उदर है, ऐसे शाकद्वीप को देखा, जिसकी सीमा में अन्यान्य देश थे।
जम्बूद्वीप में महामेरू को, जो कुलपर्वतों से परिवेष्टित था, जिसके प्रान्तमार्ग में अन्यान्य देश
थे ओर क्षारसमुद्र से धिरा था, देखा