Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 50
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
जगामाथ मरुत्संविदात्मना तामवेक्षितुम् ।
अथामुच्य नभोमार्गं विचचार त्वरान्वितः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर वायु का दिव्यदुष्टिरूप ज्ञान उसको देखने के
लिए गया यानी वायुने दिव्यदृष्टि से गन्तव्य दिशा का आलोचन किया | तदनन्तर आकाशमार्ग
को छोड़कर वायु ने शीघ्रता के साथ भूमि में पर्यटन किया