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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verses 42–43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verses 42–43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

खगदेहान्निर्जगाम सूची प्रोन्मुखचेतना । पवनाद्गन्धलेखेव घ्राणवातलवोन्मुखी ॥ ४२ ॥ जगाम गृध्रः स्वं देशं भारं त्यक्त्वेव भारिकः । निवृत्तव्याधिरिव स बभूवान्तरनाकुलः ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

बाहर निकलने के लिए जिसकी बुद्धि अत्यन्त उत्सुक थी ऐसी जीवसूची वायु से नासिका से प्राणवायु के साथ मिलने के लिए उत्सुक सुगन्धि के समान उस गीध के देह से बाहर निकल आई