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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verses 38–39

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verses 38–39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

तत्राजने महारण्ये स्थापयामास तामसौ । सर्वसंकल्परहिते पदे योगीव चेतनाम् ॥ ३८ ॥ एकेनैवाशु सा तेन पादप्रान्तेन सुस्थिता । संप्रतिष्ठापितेवाद्रिमूर्ध्नि गृध्रेण देवता ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे योगी अपनी बुद्धिवृत्ति को सम्पूर्णं संकल्पो से रहित परम पद में स्थापित करता हे, वैसे ही उस गीध ने उस निर्जन महावन में उस सूची को रक्खा