Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verses 19–20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verses 19–20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 19,20
संस्कृत श्लोक
अदृश्यया तया चेह मारुतोग्रतुरंगया ।
अयःसूच्याऽनिलतया वहन्त्या दिक्ष्वरुद्धया ॥ १९ ॥
पतिं भुक्तं विलसितं दत्तं दापितमाहृतम् ।
नर्तितं गीतमुषितमनन्तैः प्राणिदेहकैः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
मारूतरूपी तेज घोड़ेवाली, वायुरूप से बह रही,
दिशाओं में व्याप्त उस लोहमयी सूचीने अदृश्य होकर अनन्त प्राणियों की देहों से पान
किया, भोजन किया, विविध प्रकार की क्रीड़ाएँ की, दान दिया, दिलाया, आहरण किया
(छीन लिया), नाच किया, गाया और निवास किया