Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
कर्कटीकटुवृत्तान्तं सर्वमाकर्ण्य वासवः ।
नारदं परिपप्रच्छ पुनर्जातकुतूहलः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
बहत्तरवाँ सर्गे समाप्त
तिहत्तरवाँ सर्ग
जीवयुक्त सूची के भोगविस्तार का पुनःवर्णन,
तदनन्तर इन्द्र की प्रेरणा से चारों ओर वायु का सूची -अन्वेषण वर्णन ।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, इन्द्र ने कर्कटीनामक राक्षसी के क्रूर वृतान्त को
आद्योपान्त सुनकर फिर नारदजी से पूछा, क्योकि उसके वृत्तान्तको सुनने में इन्द्र को कोतूहल
हो गया था