Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 72, Verses 29–30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 72, verses 29–30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 29,30
संस्कृत श्लोक
कस्येदं तपसाक्रान्तं जगदित्यथ वासवः ।
नारदं परिपप्रच्छ स तस्याकथयच्च तत् ॥ २९ ॥
सप्तवर्षसहस्राणि सूची दीर्घतपस्विनी ।
महाविज्ञानदेहासौ तेनेदं ज्वलितं जगत् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर इन्द्र ने यह जगत् किसकी तपश्चर्या से आक्रान्त है, - ऐसा नारदजी से पूछा ।
नारदजी ने इन्द्र से सूची की तपश्चर्या कही : सात हजार वर्ष तक बड़ी भारी तपश्चर्या
करनेवाली महाविज्ञानरूप देहवाली इस सूचीने तपश्चर्या की, उससे यह जगत् प्रज्वलित
हुआ है