Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 73
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 73 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
प्रायशोऽविकहस्तस्था सुप्तोर्णा गन्धकोटरे ।
बालहस्ताङ्गुलीतल्पवेधनैकविलासिनी ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रायः
कम्बल आदि सीने के समय गडरियों के हाथ में स्थित वह सूचिका कभी उन लोगों के उनके
डुकड़ों के खोखलों में सोती है, कभी बालकों के हाथ, अंगुली आदिरूप अपने शयन के वेधन
में कौतुक करती है