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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 69

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 69 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 69

संस्कृत श्लोक

भवत्ययस्कारवित्तौ संत्यज्यान्तर्धिगामिनी । भस्त्रावातैर्विचलिता गगनादुत्पतोन्मुखी ॥ ६९ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कटे कि उसकी अन्य लोहयूचियों के साथ भी साम्य होने के कारण, कभी उनके साथ अगर वह लोहार के पास चली जाय, तो क्या करती है ? तो इस पर कहते हैं। लोहारों की प्राप्ति होने पर लोहारों द्वारा तपाने के लिए अग्नि में डाली गई वह सूचिका उनकी धौंकनी के वायु से इधर-उधर होकर उन्हें छोड़कर अदृश्य हो जाती है और आकाशकी ओर मुख करके भाग जाती है