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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verses 17–18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verses 17–18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 17,18

संस्कृत श्लोक

साग्रा संचिन्तयामास न सूचीरूपतुच्छताम् । चित्तमीहितमेवैकं पश्यन्त्यास्ते निरर्थकम् ॥ १७ ॥ अविचार्यैव सूचित्वं तया मूढधियाऽऽस्थितम् । नानर्थबुद्धेः स्फुरति पूर्वापरविचारणा ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

उसने जगत्‌ को निगलने का विचार तो किया,पर सूचीरूप तुच्छताका विचार नहीं किया । केवल एकमात्र जगद्ग्रसनरूप अभिलाषाको देख रही उसका संकल्प निरर्थक ही रहा। उस मूढमति कर्कटीने बिना विचारे ही सूची बनने की अभिलाषा की। निरर्थक बुद्धिवाले प्राणियों में पूर्वापर का विचार नहीं रहता