Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 69, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 69, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एवमस्त्विति तामुक्त्वा पुनराह पितामहः ।
सूचिका सोपसर्गा त्वं भविष्यसि विषूचिका ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामजी, "जैसा तुम चाहती हो, वैसा ही हो ।* - ऐसा कहकर
ब्रह्माजी ने फिर उससे कहा : तुम उपद्रवो से युक्त सूचिका ही नहीं, किन्तु “वि” उपसर्ग के
साथ विसूचिका होओगी