Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
अनाख्येयं परा सत्तास्यातिवाहिकतामिव ।
सा गच्छत्यप्यगच्छन्ती तादृक्सत्यात्मभावनात् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्म के ही अज्ञान से विविध आतिवाहिक देहो की प्राप्ति होती है और ज्ञान से आतिवाहिक
देहों का नाश हो जाता है, ऐसा कहते हैं।
आतिवाहिक देह की यह परा सत्ता अवर्णनीय ही है। वह सत्ता ब्रह्म के अपरिज्ञानसे मानों
आतिवाहिकता को प्राप्त होती है और ब्रह्मरूप सत्य आत्मा के परिज्ञान से उसका आतिवाहिक-
भाव नष्ट हो जाता है