Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
ब्रह्म सर्वं जगद्वस्तु पिण्डमेकमखण्डितम् ।
फलपत्रलतागुल्मपीठबीजमिव स्थितम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे एक अखण्ड स्फटिकशिला फल, पत्ते, लता, झाड़ी
और उनके आधार तथा उनके अन्तर्गत बीजरूप से स्थित है, वैसे ही यह ब्रह्म जगद्रूप से
स्थित है