Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
यद्यन्निखन्यते भूमेर्यथा तत्तन्नभो भवेत् ।
या या विचार्यते विद्या तथा सा सा परं भवेत् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
बोध की ऐसी सामर्थ्य कैसे है 2 यदि कोई ऐसी शंका करे, तो उसपर बोध, विचारजन्य
होने के कारण, तत्त्वावगाही है, इस आशय से कहते हैं ।
जैसे धरती का जो-जो स्थान खोदा जाता है, वह आकाश हो जाता है, वैसे ही जिस-
जिस आविद्यक (अविद्याकृत) घट, पट आदि का विचार किया जाता है, वह अधिष्ठानभूत
सन्मात्र हो जाता है