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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

शिवात्प्राक्कारणात्पूर्वं चिच्चेत्यकलनोन्मुखी । उदेति सौम्याज्जलधेः पयःस्पन्दो मनागिव ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सौम्य (निश्चल यानी तरंगरहित) समुद्र से पहले थोड़ा थोड़ा जल का संचलन होता है यानी तरंग उठती हैं, वैसे ही मंगलमय कारणभूत परमात्मासे पहले चैतन्यकल्पनोन्मुखी (सृष्टि के उन्मुख) चिति (चेतनशक्ति) उदित होती है