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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

अपौरुषं हि नियतिः पौरुषं सैव सर्गगा । निष्फलाऽपौरुषाकारा सफला पौरुषात्मिका ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

यद्यपि नियति ओर पौरुष शब्द का एक ही अर्थ है, फिर भी उपाधिभेद से उनमें भेद व्यवहार होता है, ऐसा कहते है । पुरुष के प्रयत्नरूप से अविवक्षित (अनिच्छित) केवल ईश्वर के संकल्पमात्र से नियति कही जाती है, वही पुरुषप्रयत्न से सृष्टिफल से उपहित होकर पौरुष कही जाती है, क्योंकि पुरूष के प्रयत्न के आकार में परिणत न हुई नियति निष्फल हे ओर पौरुषात्मिका सफल हे । भाव यह है कि नियति पुरुषार्थ रूप फलप्रदान में असमर्थ है, अतः निष्फल हे ओर पौरुष पुरूषार्थरूप फलप्रदान में समर्थ है अतः सफल हे