Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मणा चिन्मयेनात्मा सर्गात्मैव विभाव्यते ।
न भाव्यते चानन्यत्वाद्बीजेनान्तरिव द्रुमः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
भ्रमवश चिदाभासरूप जीव बना हुआ ब्रह्म सर्ग को ही अपना आत्मा जानता है
ओर तत्त्वदुष्टि से परब्रह्म से अनन्य (अभिन्न) होने के कारण नहीं जानता है, जैसे कि बीज
अपने अन्दर स्थित वृक्ष को नहीं जानता