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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

बुद्धं सदपवर्गं तत्ससर्गमपि सत्समम् । अबुद्धं सर्गरूपात्म विसर्गमपि तत्सदा ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे कि उसके मध्य में यदि सृष्टि और प्रलय निहित है, तो अपवर्ग भी सृष्टियुक्त या प्रलययुक्त, यों विविध प्रकार का होना चाहिए, एक प्रकार का नहीं, इस पर कहते हैं। परमार्थ सत्य वस्तु के ज्ञात होने पर अपवर्ग होता है । उक्त परमार्थ वस्तु सृष्टियुक्त होने पर भी विषमता से रहित ही है । यदि उसका परिज्ञान न हो, तो परमार्थतः सृष्टिशून्य भी वह सृष्टिरूप होती है