Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तदेवानिलतां वेत्ति निजसत्तात्मिकां स्वयम् ।
अन्तर्गतस्पर्शरसां पवनस्पन्दतामिव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
वही (आकाशता को प्राप्त हुआ ब्रह्म ही) स्वयं अपने में स्वसत्तात्मक वायुता का, जिसके
अन्दर स्पर्शतन्मात्रा का संस्कार उद्बुद्ध हो गया, ऐसे अनुभव करता हे, जैसे कि पवन अपने
में स्वयं स्पन्दता का (स्पन्दनक्रिया का) अनुभव करता है