Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
बलवच्चिद्विलासानामनुवृत्त्या परस्परम् ।
स्वभावाः प्रतिबिम्बन्ति चिदादर्शे स्वभावतः ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
बलवान् चिद्-विलासों
की परस्पर अनुवृत्ति से स्वभाव चित्तरूपी आदर्श में अपने आप प्रतिबिम्बित होते हैं। जगदाकार
अथवा ब्रह्माकार के जीवचैतन्यप्रतिबिम्बित होने में तीव्रवेगवत्तारूप बलवान् तत्-तत् आकार
के चिद्विलास ही नियामक हैं, यह भाव है