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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 44

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

तादृशं सदसद्रूपं स्वात्मेदं व्योमगं जगत् । महाकल्पान्तसर्गादौ चित्स्वभावमिदं जगत् ॥ ४४ ॥

हिन्दी अर्थ

महाकल्प ओर सृष्टि के आदि में यह जगत्‌ चित्‌स्वभाव ही है, असत्‌ पदार्थ ही पीछे कारण में लीन होता है, वास्तविक नहीं, इससे यह सिद्ध हुआ कि जगत्‌ असत्‌ है, उसका कारण चित्‌ ही महाप्रलय और सृष्टि में रहता है, उससे अतिरिक्त सत्‌ कुछ नहीं है