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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 6, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 6, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

साधुसंगमसच्छास्त्रपरतैवात्र कारणम् । साधनं बाधनं मोहजालस्य यदकृत्रिमम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शंका करे कि परमात्मा की प्राप्ति मे साधनभूत ज्ञान सर्वथा कर्म-निरपेक्ष कैसे है ? तो इस पर कहते हैं। (२) देव हिरण्यगर्भ, परब्रह्म आदि कारण होनेसे उसके भी देव हैं, इसलिए वे देवाधिदेव हैं । साधुसमागम तथा सत्‌-शास्त्रों के अभ्यास में तत्पर होना ही परम ब्रह्म की प्राप्ति में हेतु है, कारण कि अज्ञान-जाल का उत्पादक नित्यसिद्ध ब्रह्म जब चरमसाक्षात्कारवृत्ति मे आरूढ होता है, तब वह अज्ञानजाल का नाशक होता है, उससे अतिरिक्त अन्य कुछ भी उसका बाधक नहीं होता