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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । आवां तावदिमे लीला पश्यत्वित्येव चिन्तिते । ज्ञप्त्या देव्या ततस्तत्र दृश्ये दीप्ते बभूवतुः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, इन हमको (लीला और सरस्वती देवी को) विदूरथ की पत्नी लीला देखे, यों सरस्वती देवी के चिन्तन करते ही वहाँ पर सरस्वती और लीला दृश्य हो गई