Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

कारणेन विना कार्यमा महाप्रलयं क्वचित् । न दृष्टं न श्रुतं किंचित्स्वयं त्वेकोदयादृते ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

कारण की असत्ता में कार्य क्यो उत्पन्न नहीं होता, इस विषय में कहते हैं। कारण के बिना कार्य की उत्पत्ति महाप्रलयपर्यन्त न तो कहीं देखी गई और न सुनी गई है । सर्वथा कार्य की सत्ता कारण की सत्ता के अधीन है, यही बात सब प्रमाणों से सिद्ध होती है, यह भाव है। शंका - तो क्या ब्रह्म सत्ता भी कारणाधीन है ? समाधान - नहीं, जो स्वतः उदित यानी नित्य स्वप्रकाश ब्रह्म है, उसको छोड़कर अन्य सब वस्तुएँ कारणाधीन हैं | भाव यह है कि अनित्य सत्ता में ही कारणसत्ता की अपेक्षा होती है, नित्य सत्ता में नहीं होती