Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्देहे शवीभूते वाते चानिलतां गते । चेतनं वासनामुक्तं स्वात्मतत्त्वेऽवतिष्ठति ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

जब यह देह मुर्दा बन जाती है, प्राणवायु अपने कारणरूप महावायु में लीन हो जाता है, तब वासनारहित चेतन आत्मतत्त्व में लीन हो जाता है यानी प्राण तेज के साथ प्राज्ञ आत्मा में लीन हो जाते हैं, उपाधि का विनाश होने पर जीव भी वासनाओं के साथ परमात्मरूप से स्थित हो जाता है