Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
ततोऽपि व्याधिमरणं पुनर्मरणमूर्च्छनाम् ।
पुनः स्वप्नवदायातं पिण्डैर्देहपरिग्रहम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
उसका इलने में
छुटकारा नहीं होता, उसके बाद भी व्याधिरूपी मरण का अनुभव करता है फिर वह मरणजनित
मूर्छा को प्राप्त होता है, तदनन्तर बन्धुओं द्वारा दिये गये पिण्डों से स्वप्न के समान प्राप्त
देहग्रहण का अनुभव करता है