Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
उद्यानानि विमानानि शोभनानि पुनःपुनः ।
स्वकर्मभिरुपात्तानि दिव्यानीत्येव पुण्यवान् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें से जो महापुण्यवान होते हैं, वे वड़े मनोहर देवलोक
के विमान और उद्यानों को “ये हमारे कर्मो से बार-बार प्राप्त होते है", ऐसा जानते हैं