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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

प्रबुद्धलीलोवाच । एवमेषा प्रयाताऽस्तु भर्ता पश्य ममाम्बिके । प्रवृत्तः प्राणसंत्यागे कर्तव्यं किमिहाधुना ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

देवी के उक्त कथन को स्वीकार कर राजा की मृत्यु देखने से सूचित जीवन के नियम ओर अनियम की अनुपपत्ति देख रही लीला ने कहा । प्रबुद्ध लीला ने कहा : हे देवि, यह लीला राजा पद्म के पास चली गई, ऐसा जो आपने कहा, यह आपके कथनानुसार वैसा ही हो, इसमें मुझे कोई अनुपपत्ति नहीं दिखती । जरा अपनी आँखों से देखिये, यह मेरे पति प्राणों का त्याग करने लगे हैं, इस विषय में इस समय क्या करना चाहिए यानी इसकी उपपत्ति कैसे है ?